रायगढ़

अंधेरगर्दी : शहर का अंधेरा दूर करने निकाले गए टेंडर को लेकर विवाद..मनचाही फर्म को काम दिलाने टुकड़ों में निकाला टेंडर..? शहर सरकार में अफसरों की मनमानी को लेकर उठ रहे है सवाल..

रायगढ़। बंद पड़ी स्ट्रीट लाइट व शहर का अंधेरा दूर करने के लिए निगम द्वारा निकाले गए टेंडर में भी अंधेरगर्दी की बू आ रही है। शहर सरकार में सालों से जमें अधिकारियों की मनमानी इस कदर हावी हुई कि अब मनचाही फर्म को काम दिलाने के लिए एक व्यूह रचा गया है। जिसमें एक टेंडर के तीन टुकड़े कर अलग अलग जोन के हिसाब से टेंडर निकाला गया है। जिससे कई कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।

नगर निगम रायगढ़ के विद्युत विभाग की मनमानी और लापरवाही से शहर के वार्ड अंधेरे में डूबे हैं। वहीं निगम अधिकारी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने में जुटे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी की मानें तो ताजा मामला निगम के वार्डों को तीन जोन में बांटकर आठ-आठ लाख के ऑफ लाइन टेंडर जारी करने का है। इसमें एमआईसी या सामान्य सभा की स्वीकृति भी नहीं ली गई है। खास बात यह है कि इस पूरे प्रकरण के केंद्र में वही इंजीनियर हैं, जो पिछले कई साल से निगम में जमे हुए हैं। जानकारी के अनुसार, निगम में स्ट्रीट लाइट का ठेका समाप्त होने के बाद से विद्युत व्यवस्था पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई है। स्थिति यह है कि शहर के वार्डों में अंधेरा कायम है, लेकिन समाधान की बजाय निगम अधिकारी विवादास्पद कदम उठा रहे हैं। ऐसे में शहर के भाजपा व कांग्रेस के पार्षद भी अब एई सूरज देवांगन पर सवाल उठा रहे हैं। पार्षदों के अनुसार प्रदेश में भाजपा सरकार बने दो साल होने को है और शहर सरकार को भी सात माह हो गए हैं। इसके बावजूद कांग्रेस सरकार के समय से जमे इंजीनियर सूरज देवांगन का अब तक ट्रांसफर नहीं किया गया। नतीजतन इस अधिकारी का मनोबल बढ़ता जा रहा है और वह खुलेआम नियम विपरीत कार्यों को अंजाम दे रहे हैं।

नियमों को ताक पर रखकर टेंडर
नगरीय प्रशासन विभाग ने 10 लाख रुपये से अधिक के कार्यों पर ऑनलाइन टेंडर की अनिवार्यता तय की है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। इसके बावजूद अधिकारी ने वार्डों को तीन जोन में बांटकर आठ-आठ लाख रुपये के ऑफलाइन टेंडर जारी किए। जानकारों के अनुसार, एक ही श्रेणी के कार्य को टुकड़ों में बांटना नियमों के विपरीत कहा जाता है।

तो क्या अंधेरे में छिप रहा विकास.?
शहर के विधायक और वित्त मंत्री ओपी चौधरी जहां एक ओर रात-दिन शहर विकास के सपने देख उन्हें चरितार्थ करने में लगे हैं तो वहीं निगम का विद्युत अमला अंधेरगर्दी कर विकास को ढंकने में लगा हुआ है। आज शहर के प्रमुख मार्गों से लेकर गली मोहल्लों में अंधेरा पसरा हुआ है। निगम के जानकार और कुछ वरिष्ठ पार्षद इसे सुनियोजित अंधेरा करार दे रहे हैं। मेंटनेंस के नाम पर खरीदी टेंडर में ज्यादा रूचि दिखाने के कारण जानबूझकर शहर को अंधेरे में रखा जा रहा है और इन सबके पीछे निगम में सालों से जमे एई सूरज देवांगन पर आरोप लग रहे हैं।

खबर स्त्रोत : दैनिक जनकर्म

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