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डॉ आर.एल.हॉस्पिटल के विशेषज्ञ चिकित्स्कों ने दिया मरीज को नया जीवन.. मल्टीपल इंजरी के मरीज का हुआ सफल ऑपरेशन..

रायगढ़। शहर के मध्य स्थित डॉ.आर.एल.हॉस्पिटल पिछले कई वर्षो से लोगो के लिए विश्वास का पर्याय बन चुका है। हॉस्पिटल अनवरत अपने मरीजों को विश्वसनीय सुविधा के लिए प्रतिबद्ध है जहां मानवीय संवेदना और सेवा के साथ मरीजों को हमेशा श्रेष्ठ उपचार व सुविधा देने का प्रयास किया जाता रहा है। अस्पताल मरीजों और उनके परिजनों के विश्वास पर हमेशा से खरा उतरा है। इस बार फिर डॉ.आर. हॉस्पिटल के विशेषज्ञ  चिकित्स्कों ने मल्टीपल चोटिल व्यक्ति को स्वस्थ कर उसे नया जीवन दिया है।

ऑपरेशन के पहले
ऑपरेशन के पहले
ऑपरेशन के बाद
ऑपरेशन के बाद

क्या कहते है डॉक्टर…. इस सम्बन्ध में डॉ.आर.एल.हॉस्पिटल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि 25 वर्षीय पुरुष नाम न छापने के शर्त पर जो रायगढ़ निवासी है अपने गाँव से बाइक मे जा रहा था सामने से आ रही  अन्य बाइक  से  टकरा  जाने से गंभीर रूप से चोटग्रस्त हो गया था, अस्पताल जाँच हेतु आया था। टक्कर की वजह से मरीज का ( डिस्टल रेडियस फ्रैक्चर) हड्डी के कलाई के पास वाला सिरा जो कलाई को गति प्रदान करता है टूट गया था। इसके अलावा (टीबीया फिबुला ) पिंडली की बड़ी  हड्डी व पिंडली की छोटी हड्डी जो टीबीया के साथ मिलकर निचले पैर का निर्माण करते है जिसमे टीबीया मुख्य भाग उठाने वाली हड्डी  होती है l व फिबुला सहारा देती है दोनों टूट गया था व ( पी. सी. एल.) धागा जो घुटने के पीछे का मजबूत लिगामेन्ट होता है। जो जाँघ की हड्डी (फिमर ) को पिंडली की हड्डी (टीबीया ) से जोड़ता है वह भी टूट गया था मरीज असहनीय दर्द से कराह रहा था। डॉक्टर ने मरीज तात्कालिक जाँच  कर भर्ती कराने की सलाह दी। इस तरह के जटिल व मल्टीपल चोट बिना ऑपरेशन के ठीक नई हो पता है। हॉस्पिटल के डायरेक्टर व हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत ने मरीज के परिजन को सारे शल्य क्रिया के बारे मे बताया व ऑपरेशन हेतु  प्रेरित किया। व अस्पताल मे कार्यरत हड्डी रोग विशेषज्ञ  डॉ अनंत सिंग के साथ मिलकर मरीज को तीन  चरणों मे ऑपरेशन उसे नया जीवन दिया l डॉ. आर. हॉस्पिटल की  टीम ने यह मल्टीपल सर्जरी करके  मरीज को एक बड़े परेशानी से बाहर निकाला। मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है व चल फिर सकता है।

टीम वर्क से  मिली सफलता…  शल्य  क्रिया के दौरान डॉ. प्रशांत अग्रवाल, डॉ अनंत सिंग के साथ ओ टी स्टाफ मनोज, विनोद, शीतल, ललिता, तिलकुमारी  पुरुषोत्तम,  रितेश  व साहयोगी ओ. टी.स्टाफ ने मिलकर ऑपरेशन को सफल बनाया।

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