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पीएम आवास निर्माण में नियमों की अनदेखी : न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद दूसरे की निजी भूमि पर बन रहा प्रधानमंत्री आवास..हितग्राही को भूस्वामी अधिकार देने की आवश्यकता नही..RTI में चौंकाने वाला खुलासा

लैलूंगा– कोतबा-बागबहार क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हितग्राही द्वारा दूसरे व्यक्ति की निजी भूमि पर आवास निर्माण का गंभीर मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस प्रकरण में न्यायालय तहसीलदार बागबहार द्वारा पूर्व में दिनांक 12.01.2024 को स्थगन आदेश जारी किया जा चुका है पुनः 12.01.2026 को स्थगन आदेश जारी किया गया है, इसके बावजूद संबंधित भूमि पर निर्माण कार्य जारी रहना न्यायालयीन आदेशों की खुली अवहेलना मानी जा रही है। मामला बागबहार तहसील के थाना क्षेत्र कोतबा के ग्राम खजरीढाप का है। खसरा नंबर 11/1 एवम 11/2 भूमि स्वामी हक की भूमि पर दूसरे हितग्राही के प्रधानमंत्री आवास निर्माण से संबंधित है। प्रधानमंत्री आवास हितग्राही के बिना भूस्वामी हक की भूमि पर आवास कैसे स्वीकृत हुआ। कैसे जिओ ट्रैक हुआ और कैसे राशि का भुगतान हुआ ये सब जांच का विषय है।

वर्ष 2024 में जारी स्थगन आदेश
12/01/2026 को जारी स्थगन आदेश

पारदर्शिता के लिए जब सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही के नाम पर स्वीकृत आवास से संबंधित दस्तावेज, नक्शा, खसरा, बी-1 एवं शपथ पत्र की सत्यापित छायाप्रति की जनपद पंचायत पत्थलगांव से मांग की गई, तो कार्यालय जनपद पंचायत पत्थलगांव द्वारा दिनांक 12.08.2024 को लिखित रूप से बताया गया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत हितग्राही से नक्शा, खसरा, बी-1 एवं शपथ पत्र नहीं लिया जाता है।

इस खुलासे के बाद यह सवाल और गहरा गया है कि बिना भूमि संबंधी दस्तावेजों के आखिर किस आधार पर आवास स्वीकृत किए जा रहे हैं, और कैसे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि निर्माण वैध भूमि पर ही हो।
पीड़ित भूमि स्वामी का कहना है कि उसकी बिना सहमति उसकी निजी भूमि पर निर्माण कराया जा रहा है, और शिकायतों के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने, निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने तथा दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही यह भी मांग की गई है कि भविष्य में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत भूमि स्वामित्व की स्पष्ट जांच को अनिवार्य किया जाए, ताकि ऐसे विवाद दोबारा न हों।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है।

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