अजब कोतवाली पुलिस की गजब करतूत..देर रात 11 बजे गृह भेदन की वारदात..पर कोतवाली पुलिस ने लगाई दिन के समय की असंगत धारा… महिला अपराध पर भी विवेचक दे रहे है ऊलजुलूल तर्क..

रायगढ़ (फॉलो अप)। बीते एक साल से शहर कोतवाली पुलिस अपनी अजब गजब कार्यशैली और उदासीन रवैए की वजह से न सिर्फ जिले भर में बल्कि पूरे सूबे में रायगढ़ पुलिस की फजीहत करा रही है आए दिन कुछ न कुछ ऐसा वाकया सामने आ ही जाता है जिससे शहर कोतवाली पुलिस की कार्यशैली से सूबे में काबिज़ सुशासन सरकार के जीरो टॉलरेंस नीति की धज्जियां स्वमेव उड़ जाती है ऐसा ही एक वाकया बीते 29 सितंबर की रात को हुआ , जब कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित दीनदयाल अपार्टमेंट में रहने वाली एक महिला के घर देर रात 11 बजे के करीब आरोपी अनुज सिंह, जय सिंह और छोटू पठान बलात दरवाजा तोड़कर दाखिल हुए और उसके साथ गाली गलौच, हुज्जतबाजी और धमकी की वारदात को अंजाम देकर वहां से फरार हो गए, पीड़ित महिला आपबीती की रिपोर्ट दर्ज कराने कोतवाली थाने पहुंची , तब मौके पर मौजूद पुलिस कर्मी ने रात का हवाला देकर रिपोर्ट दर्ज करने से टाल दिया, और जब पीड़िता के पति ने CSP से संपर्क कर पूरी वारदात को संक्षेप में बताया तो उनके हस्तक्षेप के बाद ही सुबह मामले के विवेचक ऐनु देवांगन ने गैर जमानतीय धारा 333 BNS और अन्य तीन जमानतीय धाराओं में FIR दर्ज किया।

यहां यह बताना उचित होगा कि रात्रि के समय अर्थात सूर्यास्त से सूर्योदय के मध्य यदि गृह भेदन की वारदात घटित होती है तो BNS में 331(5) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया जाना है जबकि इस मामले में 333 के तहत किया गया है जो कि दिन के समय गृह भेदन करने पर लगाया जाता है वही मामले में पीड़िता और उसके पति का साफ तौर पर कहना है कि विवेचक पहले दिन से ही पीड़िता साथ हुई बदसलूकी के दौरान उनके वस्त्र फाड़ने की बात पर जो धारा लगनी चाहिए थी वो न लगाकर यह बोलकर टरका दिए कि कोर्ट में आपकी बदनामी होगी, वही आज जब पीड़िता के पति बाहर से आने के बाद पीड़िता के साथ कोतवाली थाना पहुंचे तो पहले विवेचक देवांगन ने कहा कि फटे कपड़े लाईए वो कानूनसंगत धारा जोड़ देंगे और फिर 10 मिनट बाद जब पीड़ित दंपति फटे कपड़े लेकर वापस थाने पहुंचे तो फिर से विवेचक पुराना राग अलापने लगे कि वस्त्र फाड़ने की धारा नही लगाएंगे और जो नुकसान हुआ है कपड़ा फटने से उस धारा को जोड़ देंगे FIR में, जबकि यहां मामला सीधे तौर पर एक महिला के साथ हुए संगीन अपराध से जुड़ा हुआ है ऐसे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार पहले ही दिन में वांछित सुसंगत धाराओं के तहत FIR दर्ज करना चाहिए था लेकिन यहां भी विवेचक द्वारा महिला को कोर्ट में बदनामी होने की बात कहकर टरकाया जा रहा है जिससे कि परोक्ष रूप से जेल में निरुद्ध मुख्य आरोपी अनुज सिंह को उसकी जमानत अर्जी की होने वाली सुनवाई में फायदा मिलने की पूरी संभावना है..(पीड़िता के पति के बताए अनुसार )
यह है पूरा मामला 👇
बीते 29 अक्टूबर की देर रात करीबन 11 बजे कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित बड़े रामपुर इलाके के दीनदयाल अपार्टमेंट के एक मकान में अपने दो मासूम बच्चों के साथ रहने वाली महिला के घर बलात दरवाजा तोड़कर घुसने और उसके साथ हुज्जतबाजी, गाली गलौच, जान से मारने की धमकी और बदसलूकी करने वाले ट्रांसपोर्टर अनुज सिंह को आज माननीय कोर्ट ने जेल भेज दिया है बता दें कि आज दोपहर को पुलिस ने मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी अनुज सिंह को कोर्ट में पेश किया था जहां आरोपी द्वारा जमानत हेतु अपील की गई थी लेकिन माननीय कोर्ट की विद्वान न्यायधीश ने आवेदक प्रार्थिया के अधिवक्ता सीनियर अधिवक्ता आशीष मिश्रा द्वारा कोर्ट में प्रस्तुत की गई सटीक दलील और प्रस्तुत तथ्य को संज्ञान में लेते हुए आरोपी अनुज सिंह की जमानत को निरस्त कर उन्हें जेल निरुद्ध करने का आदेश दिया है।

यहां यह भी बताना लाजिमी होगा कि आवेदक प्रार्थिया की ओर से आरोपी की जमानत का विरोध करते हुए अधिवक्ता आशीष मिश्रा ने स्पष्ट तौर पर कोतवाली पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाया गया और कहा गया कि जांच अधिकारी आरोपी के प्रभाव में है तभी देर रात घटित संगीन अपराध में वांछित सुसंगत धारा गैर जमानतीय धारा BNS 331(5) व 331(6) के तहत अपराध पंजीबद्ध करने की बजाय गैर जमानतीय धारा 333 BNS व अन्य तीन जमानतीय धाराओं में अपराध दर्ज किया गया है जबकि घटना देर रात 11 बजे की है जिसमें नए कानून BNS के मुताबिक गैर जमानतीय धारा BNS 331(5) व 331(6) लगाना चाहिए था जिरह के दौरान पीड़िता के अधिवक्ता आशीष मिश्रा ने पुलिस पर यह भी आरोप लगाया कि साथ ही महिला के साथ की गई बदसलूकी और वस्त्र फाड़ने की धारा भी प्राथमिकी में दर्ज नही की गई है जिससे साफ पता चलता है कि कोतवाली पुलिस, आरोपी के प्रभाव में है।




