रायगढ़ कार्बन प्लांट हादसा : बच्ची, पति-ससुर समेत 4 मौतें , 3 महीने पहले भी एक बेटी खोई थी, युवक की भी जान गई, 3 का इलाज जारी.. दादी पर केस वापस लेने का दबाव.. ईलाज बंद कराने की धमकी का आरोप.. प्लांट मालिक अविनाश गर्ग का नाम FIR में अब तक शामिल नही..

रायगढ़। अस्पताल के वार्ड में गूंजती एक महिला की चीखें और पास खड़ी नर्स उसे संभालने की कोशिश करती रहीं, लेकिन उसका दर्द किसी के बस में नहीं था। उसने अपनी 9 महीने की दूधमुंही बच्ची और पति को खो दिया। वहीं बुधवार दोपहर ससुर ने भी दम तोड़ दिया है। साहेब लाल खड़िया वेंटिलेटर पर थे।
रायगढ़ मंगल कार्बन प्लांट हादसे ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है। गरीबी और पेट पालने की मजबूरी में मां-बाप प्लांट में मजदूरी करते थे और छोटी बच्चियों को साथ लेकर जाते थे। हादसे के दिन भी 9 महीने की भूमि को पास में लेटाकर मां उदासिनी खड़िया और पिता शिव खड़िया काम कर रहे थे।
हादसा होने के बाद छोटी बच्ची भी चपेट में आ गई। मंगलवार को इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार किया ही थी कि देर रात पिता ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। जबकि एक अन्य घायल युवक की भी इलाज के दौरान मौत हो गई।
3 महीने पहले भी खो दी थी एक बेटी
परिजनों ने बताया कि तीन महीने पहले 3 साल की बच्ची सृष्टि की भी मौत हो चुकी थी। रिश्तेदारों के अनुसार, मजदूरी के दौरान उदासिनी अपनी दोनों बच्चियों को प्लांट परिसर में ही रखती थी और वहीं काम करती थी।
काम में व्यस्त रहने के कारण बच्ची प्लांट में धूल-मिट्टी खा ली थी, जिससे बच्ची की तबीयत बिगड़ी और खून की उल्टियां होने लगी। लेकिन इलाज के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।
कई परिजन झुलसे, वेंटिलेटर पर जिंदगी से जंग
परिवार के सदस्य समयलाल खड़िया ने बताया कि हादसे में बड़ा भाई साहेबलाल खड़िया, भतीजा शिव खड़िया, बहू उदासिनी 2 साल से प्लांट में काम कर रहे थे। बच्ची को अपने साथ ले जाते थे। घटना वाले दिन भी बच्ची को लेटाकर सभी काम कर रहे थे।
जिस दिन हादसा हुआ पहले उन्हें खरसिया के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर रायपुर रेफर किया गया। इस दौरान प्लांट के फर्नेस में आग का तेज प्रेशर बाहर निकला और 8 लोग झुलस गए।
Google Preferred Source CTA
रायगढ़ कार्बन प्लांट हादसा…बच्ची, पति-ससुर समेत 4 मौतें:3 महीने पहले भी एक बेटी खोई थी, युवक की भी जान गई, 3 का इलाज जारी
रायपुर3 घंटे पहलेलेखक: सिद्धार्थ श्रीवासन
अस्पताल के वार्ड में गूंजती एक महिला की चीखें और पास खड़ी नर्स उसे संभालने की कोशिश करती रहीं, लेकिन उसका दर्द किसी के बस में नहीं था। उसने अपनी 9 महीने की दूधमुंही बच्ची और पति को खो दिया। वहीं बुधवार दोपहर ससुर ने भी दम तोड़ दिया है। साहेब लाल खड़िया वेंटिलेटर पर थे।
रायगढ़ मंगल कार्बन प्लांट हादसे ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है। गरीबी और पेट पालने की मजबूरी में मां-बाप प्लांट में मजदूरी करते थे और छोटी बच्चियों को साथ लेकर जाते थे। हादसे के दिन भी 9 महीने की भूमि को पास में लेटाकर मां उदासिनी खड़िया और पिता शिव खड़िया काम कर रहे थे।
हादसा होने के बाद छोटी बच्ची भी चपेट में आ गई। मंगलवार को इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार किया ही थी कि देर रात पिता ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। जबकि एक अन्य घायल युवक की भी इलाज के दौरान मौत हो गई।
देखिए पहले ये तस्वीरें-
भाई और नर्स बेटी के शव को दिखाने मां को लेकर आए। – Dainik Bhaskar
भाई और नर्स बेटी के शव को दिखाने मां को लेकर आए।
महिला ने अपनी 9 महीने की दूधमुंही बच्ची और पति को खो दिया। – Dainik Bhaskar
महिला ने अपनी 9 महीने की दूधमुंही बच्ची और पति को खो दिया।
बेटी के शव से लिपटकर रोते दिखी मां। भाई ने की संभालने की कोशिश। – Dainik Bhaskar
बेटी के शव से लिपटकर रोते दिखी मां। भाई ने की संभालने की कोशिश।
3 महीने पहले भी खो दी थी एक बेटी
परिजनों ने बताया कि तीन महीने पहले 3 साल की बच्ची सृष्टि की भी मौत हो चुकी थी। रिश्तेदारों के अनुसार, मजदूरी के दौरान उदासिनी अपनी दोनों बच्चियों को प्लांट परिसर में ही रखती थी और वहीं काम करती थी।
काम में व्यस्त रहने के कारण बच्ची प्लांट में धूल-मिट्टी खा ली थी, जिससे बच्ची की तबीयत बिगड़ी और खून की उल्टियां होने लगी। लेकिन इलाज के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।
कई परिजन झुलसे, वेंटिलेटर पर जिंदगी से जंग
परिवार के सदस्य समयलाल खड़िया ने बताया कि हादसे में बड़ा भाई साहेबलाल खड़िया, भतीजा शिव खड़िया, बहू उदासिनी 2 साल से प्लांट में काम कर रहे थे। बच्ची को अपने साथ ले जाते थे। घटना वाले दिन भी बच्ची को लेटाकर सभी काम कर रहे थे।
जिस दिन हादसा हुआ पहले उन्हें खरसिया के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर रायपुर रेफर किया गया। इस दौरान प्लांट के फर्नेस में आग का तेज प्रेशर बाहर निकला और 8 लोग झुलस गए।
‘केस वापस लेने का दबाव
परिजनों का आरोप है कि प्लांट प्रबंधन की ओर से केस वापस लेने और बयान बदलने का दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि प्लांट में टायर जलाकर तेल निकाला जाता था और सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। अचानक ब्लास्ट होने से यह हादसा हुआ, जिसमें कई मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए।
वर्कर सेफ्टी का ध्यान नहीं रखा गया
उदासिनी के भाई सूरज किसान ने बताया कि 9 महीने की भांजी और जीजा की मौत हो गई। बहन अस्पताल में भर्ती है और उसका रो-रोकर बुरा हाल है। काम के दौरान सुरक्षा गाइडलाइन का पालन नहीं किया जाता था। इस वजह से ये हादसा हुआ है।
सूरज ने बताया कि बहन के चार बच्चों में से अब दो की मौत हो चुकी है, जबकि एक बेटा और एक बेटी घर पर हैं।
जानिए क्या था पूरा मामला?
दरअसल, 5 फरवरी को खरसिया थाना क्षेत्र के बानीपाथर स्थित मंगल कार्बन प्लांट में काम के दौरान बड़ा हादसा हुआ था। फर्नेस को खोलते ही आग का तेज प्रेशर बाहर निकला और पास में काम कर रहे 8 मजदूर उसकी चपेट में आ गए।
इस प्लांट में पुराने टायर पिघलाकर काला तेल निकाला जाता है, जो रोड बनाने के काम आता है। आरोप है कि फर्नेस को ठंडा किए बिना खोला गया। मजदूरों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए। इसी लापरवाही की वजह से यह भयावह हादसा हुआ।
FIR वापस लेने का दबाव- परिजन
परिजनों के अनुसार, हादसे के बाद प्लांट प्रबंधन के खिलाफ खरसिया थाने में FIR दर्ज की गई थी। अब प्रबंधन की ओर से लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि, वे शिकायत वापस लें और बयान बदल दें।
मुआवजा और निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़ित परिवारों की मांग है कि, मृत बच्ची के परिजनों को तत्काल उचित मुआवजा दिया जाए। सभी घायलों के इलाज का पूरा खर्च प्लांट प्रबंधन से वसूला जाए। FIR वापस लेने के दबाव की निष्पक्ष जांच हो। दोषी प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।
खबर स्त्रोत : दैनिक भास्कर



