मरीन ड्राइव निर्माण परियोजना में श्रमिक की मौत…मिक्सर मशीन के नदी में पलटने से हुआ हादसा..ठेका कंपनी और निर्माण एजेंसी की जवाबदेही पर सवाल…? हादसे को लेकर पूर्व वरिष्ठ पार्षद व कांग्रेस नेता संजय देवांगन ने सोशल मीडिया पर उठाए महत्वपूर्ण सवाल…

रायगढ़। जूटमिल थाना क्षेत्र के प्रगतिनगर इलाके में निर्माणाधीन मरीन ड्राइव परियोजना में हुए हादसे में एक श्रमिक की मौत के बाद पूरे मामले को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के बीचों-बीच चल रहे इस महत्वाकांक्षी निर्माण कार्य में हुई दुर्घटना ने न केवल श्रमिक सुरक्षा व्यवस्थाओं पर प्रश्नचिह्न लगाया है, बल्कि निर्माण एजेंसी और संबंधित विभागों की जवाबदेही को लेकर भी बहस छेड़ दी है।

जानकारी के अनुसार, प्रगतिनगर क्षेत्र में वर्षभर पहले व्यापक अतिक्रमण हटाने और बुलडोजर कार्रवाई के बाद वर्तमान में मरीन ड्राइव का निर्माण कार्य जारी है। इस परियोजना का ठेका बाराद्वार निवासी कैलाश अग्रवाल की कंपनी को दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इसी निर्माण कार्य के दौरान हुए हादसे में एक श्रमिक की जान चली गई।
घटना के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि घायल श्रमिक को तत्काल सरकारी अस्पताल के बजाय निजी अस्पताल ले जाया गया। इसे लेकर पारदर्शिता और दुर्घटना प्रबंधन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन अथवा निर्माण एजेंसी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
पूर्व वरिष्ठ कांग्रेस पार्षद संजय देवांगन ने उठाए महत्वपूर्ण सवाल : घटना के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कांग्रेस के पूर्व वरिष्ठ पार्षद संजय देवांगन ने कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं। इनमें यह शामिल है कि क्या निर्माण कार्य के दौरान नदी से पानी लेने की वैधानिक अनुमति प्राप्त की गई थी ..? क्या मौके पर निर्माण एजेंसी का कोई जिम्मेदार इंजीनियर अथवा टाइमकीपर मौजूद था ..? दुर्घटना के समय सुरक्षा मानकों का पालन किस स्तर तक किया जा रहा था ?

इसके अतिरिक्त यह मांग भी उठ रही है कि यह स्पष्ट किया जाए कि मृतक श्रमिक का बीमा कराया गया था या नहीं तथा दुर्घटना की स्थिति में उसके परिजनों को नियमानुसार मुआवजा और अन्य वैधानिक लाभ उपलब्ध कराए जाएंगे या नहीं ? श्रमिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई है तो इसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों को लेकर पूर्व में भी सवाल उठाए गए थे, लेकिन उन शिकायतों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। अब हादसे के बाद इन मुद्दों की स्वतंत्र जांच की मांग तेज हो गई है।
शहर के मध्य स्थित इस महत्वपूर्ण परियोजना में हुई मौत ने विकास कार्यों के साथ सुरक्षा प्रबंधन की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित किया है। नागरिकों का मानना है कि परियोजनाओं की गति जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही आवश्यक श्रमिकों की सुरक्षा, तकनीकी निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी है।
फिलहाल जूटमिल थाना पुलिस तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों द्वारा मामले की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारियों की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।



