जिला जेल या “मौत का गढ़” .? दो महीने में दूसरी संदिग्ध मौत , शरीर पर चोट के निशानों ने खड़े किए कई गंभीर सवाल.. बंदी संजय बघेल की मौत से मचा बवाल.. परिजनों ने लगाए मारपीट और रिश्वतखोरी के आरोप..जेल प्रशासन कटघरे में…?

रायगढ़। जिला जेल रायगढ़ एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। महज दो महीने के भीतर एक और बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उंगली उठा दी है। इस बार मामला कोतरा रोड थाना क्षेत्र के ग्राम नावापारा निवासी संजय बघेल की मौत का है, जिसकी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। लेकिन मौत से ज्यादा चर्चा उस सवाल की हो रही है जिसका जवाब अभी तक किसी के पास नहीं है – आखिर जेल के भीतर संजय के साथ हुआ क्या था ?
मृतक के परिजनों का आरोप है कि संजय की मौत सामान्य नहीं है। उनका कहना है कि शव पर मौजूद गंभीर चोटों के निशान पूरे घटनाक्रम को संदेहास्पद बना रहे हैं। परिजनों का दावा है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। उन्होंने एक पुलिसकर्मी पर रिश्वत लेने तक के गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।
दो महीने में दूसरी मौत, फिर भी जवाब नहीं
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिला जेल में ऐसा क्या हो रहा है कि दो महीने के भीतर दूसरी बार एक बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाती है। पिछली घटना के सवाल अभी ठंडे भी नहीं पड़े थे कि एक और मौत ने पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया है। यदि जेल को सबसे सुरक्षित सरकारी संस्थानों में गिना जाता है, तो फिर वहां बंद व्यक्ति की जान कैसे चली जाती है?
शरीर पर चोट के निशान क्या बयां कर रहे हैं?

संजय बघेल के शरीर पर बताए जा रहे चोट के निशानों ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। यदि बंदी की तबीयत खराब थी तो ये चोटें कैसे आईं? यदि कोई अप्रिय घटना हुई थी तो उसकी जानकारी किस स्तर पर दर्ज की गई? क्या जेल प्रशासन के पास इन सवालों के जवाब हैं? यही वे बिंदु हैं जिनकी निष्पक्ष जांच की मांग अब जोर पकड़ रही है।
जेल से अस्पताल तक पहुंचने की नौबत क्यों आई?
घटना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि संजय को जेल से मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाने की आवश्यकता आखिर क्यों पड़ी। उसकी हालत कब बिगड़ी, किस परिस्थिति में बिगड़ी और उसे समय पर उपचार मिला या नहीं—ये सभी सवाल अब जांच का विषय बन चुके हैं। फिलहाल इन सवालों के जवाब धुंध में हैं और इसी वजह से संदेह गहराता जा रहा है।
ग्रामीणों में आक्रोश , न्यायिक जांच की मांग
नावापारा और आसपास के क्षेत्रों में घटना को लेकर भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही, मारपीट, भ्रष्टाचार या अधिकारों का दुरुपयोग हुआ है तो जिम्मेदार लोगों को कानून के कठघरे तक पहुंचाया जाना चाहिए। लोगों ने मामले की न्यायिक जांच कराए जाने और पूरी सच्चाई सार्वजनिक करने की मांग की है।
सवाल जिनके जवाब पूरे रायगढ़ को चाहिए
1. दो महीने में दूसरी संदिग्ध बंदी मौत क्यों ?
2.संजय बघेल के शरीर पर चोट के निशान कैसे आए?
3. जेल के भीतर उसकी तबीयत किन परिस्थितियों में बिगड़ी ?
4. परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है ?
5.क्या किसी स्तर पर लापरवाही या हिंसा हुई ?
यदि नहीं, तो फिर मौत की वास्तविक वजह क्या है ?
फिलहाल जिला जेल रायगढ़ में हुई यह मौत कई सवाल छोड़ गई है। जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन इतना जरूर है कि लगातार दूसरी संदिग्ध बंदी मौत ने जेल प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। अब पूरे जिले की निगाह जांच पर टिकी है, क्योंकि लोग जानना चाहते हैं कि आखिर जेल की ऊंची दीवारों के पीछे सच क्या है..?




