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विजयपुर जमीन विवाद : हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन सक्रिय.. सीमांकन प्रकरण में बाउंड्रीवाल निर्माण हेतु रायगढ़ तहसीलदार ने मांगा पुलिस बल…

रायगढ़। ग्राम विजयपुर स्थित खसरा नंबर 21/4 की भूमि के सीमांकन (डिमार्केशन) को लेकर लंबे समय से लंबित प्रकरण में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मामले में याचिकाकर्ता खीरसागर नेताम द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने तहसीलदार रायगढ़ को लंबित सीमांकन आवेदन का निराकरण 45 दिनों के भीतर कानून के अनुसार करने का निर्देश दिया था।

न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता ने 11 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 125 के तहत सीमांकन के लिए आवेदन दिया था। रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट हुआ कि 12 दिसंबर 2025 को तहसीलदार ने राजस्व निरीक्षक और पटवारी से प्रतिवेदन मांगा था, लेकिन इसके बाद मामले में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। इस पर अदालत ने संबंधित प्राधिकारी को आवेदन पर शीघ्र निर्णय लेने के निर्देश दिए।

40 लाख में खरीदी गई भूमि का मामला

याचिका के अनुसार, खीरसागर नेताम ने रायगढ़ तहसील के ग्राम विजयपुर स्थित लगभग 0.405 हेक्टेयर भूमि को फरवरी 2025 में करीब 40 लाख रुपये में क्रय किया था। भूमि का नामांतरण भी राजस्व अभिलेखों में दर्ज हो चुका है। इसके बावजूद सीमांकन प्रक्रिया लंबित रहने से भूमि का उपयोग प्रभावित होने की बात याचिका में कही गई थी।

पुलिस बल उपलब्ध कराने का पत्र जारी

इस बीच, 19 जून 2026 को तहसीलदार रायगढ़ द्वारा थाना प्रभारी, चक्रधरनगर को पत्र जारी कर संबंधित भूमि पर बाउंड्रीवाल निर्माण के दौरान पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि भूमि का सीमांकन कराया जा चुका है तथा आवेदक द्वारा भूमि को अतिक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए बाउंड्रीवाल निर्माण कराया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार कुछ अज्ञात असामाजिक तत्व निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं, जिससे विवाद और शांति भंग होने की आशंका बनी हुई है। इसी कारण निर्माण कार्य को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए महिला एवं पुरुष पुलिस बल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।

मामले पर बढ़ीं निगाहें

हाईकोर्ट के आदेश और उसके बाद पुलिस बल की मांग से जुड़े पत्र के सामने आने के बाद यह प्रकरण एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सीमांकन और भूमि संबंधी प्रक्रिया का अंतिम निराकरण प्रशासन किस प्रकार और कितनी शीघ्रता से करता है।

(नोट: हाईकोर्ट ने अपने आदेश में भूमि स्वामित्व या विवाद के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है।)

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