
रायगढ़। एक ओर भूमिगत जल स्तर में लगातार गिरावट को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर रायगढ़ शहर और उसके आसपास लगभग 10 किलोमीटर की परिधि में स्थित दर्जनों तालाबों और पारंपरिक जलाशयों को पाटने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कई स्थानों पर तालाबों को पूरी तरह भरकर कॉलोनियों और व्यावसायिक परियोजनाओं का निर्माण शुरू कर दिया गया है, जिससे भविष्य में शहर के सामने गंभीर जल संकट खड़ा होने की आशंका बढ़ गई है।

पर्यावरणविदों और जल संरक्षण से जुड़े जानकारों का मानना है कि रायगढ़ के भूजल स्तर को बनाए रखने में इन तालाबों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बरसात के पानी को संचित कर यही जलाशय भूमिगत जल का पुनर्भरण (रिचार्ज) करते हैं। लेकिन तेजी से हो रहे शहरी विस्तार और भूमि के बढ़ते व्यावसायिक मूल्य के कारण प्राकृतिक जल स्रोतों को मिटाने का खेल जारी है।

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न मामलों में स्पष्ट किया है कि तालाब, सरोवर और अन्य जल निकाय केवल भूमि का टुकड़ा नहीं बल्कि पर्यावरणीय संपदा हैं, जिनकी रक्षा और पुनर्स्थापना करना राज्य की जिम्मेदारी है। न्यायालय ने यह भी कहा है कि अतिक्रमण या भराव के कारण समाप्त हो चुके तालाबों को पुनर्जीवित किया जाना चाहिए तथा उनके जलग्रहण क्षेत्रों से अवरोध हटाए जाने चाहिए।
इसके बावजूद रायगढ़ में कई ऐसे उदाहरण सामने आ रहे हैं जहां वर्षों पुराने तालाबों को मिटाकर प्लॉटिंग और कॉलोनियों का विकास किया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो आने वाले वर्षों में शहर को पेयजल संकट, जलभराव और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार तालाब केवल जल संग्रहण का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे स्थानीय तापमान को नियंत्रित करने, जैव विविधता को संरक्षित रखने और भूजल स्तर को बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। एक तालाब का समाप्त होना पूरे क्षेत्र के जल चक्र को प्रभावित करता है।

अब सवाल यह है कि जब सर्वोच्च न्यायालय जलाशयों की सुरक्षा को लेकर बार-बार सख्त निर्देश दे चुका है, तब रायगढ़ में तालाबों को पाटने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या संबंधित विभागों ने ऐसे जलाशयों का सर्वे कराया है? क्या जलाशयों के मूल रिकॉर्ड और सीमांकन की जांच की जा रही है? और सबसे बड़ा सवाल—क्या विकास के नाम पर शहर अपने भविष्य का पानी दफन कर रहा है?
यदि प्रशासन ने शीघ्र हस्तक्षेप नहीं किया, तो आने वाली पीढ़ियां शायद केवल दस्तावेजों और पुराने नक्शों में ही इन तालाबों को देख पाएंगी।
“सुप्रीम कोर्ट क्या कहता है?”
👉 तालाबों और जलाशयों का संरक्षण राज्य का सर्वोपरि दायित्व है।
👉 जलाशयों को पाटकर निजी उपयोग में देना अवैध माना गया है।
👉अतिक्रमण हटाकर जलाशयों को पुनर्स्थापित करने के निर्देश दिए गए है।





